
सबसे पहले 3 बड़े बयान…
1. ‘हमारा गठबंधन सिर्फ चुनाव को लेकर था। अब किसी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं है।’ राजेश राम, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष (1 दिसंबर 2025)
2. ‘कांग्रेस ने अभी ‘समीक्षा बैठकें’ पूरी की हैं। हम आगे की दिशा तय करने की प्रक्रिया में हैं। एक और बैठक होने वाली है, जिसके बाद हम तय करेंगे कि आगे क्या करना है। अभी हमारे पास सभी विकल्प खुले हैं।’ कृष्णा अल्लावरू, बिहार कांग्रेस प्रभारी (7 दिसंबर 2025)

3. ‘RJD से गठबंधन का कोई मतलब नहीं है। यह आत्मघाती कदम है।’ शकील अहमद खान, कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता (29 दिसंबर 2025)
विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और RJD के बीच पैदा हुई तल्खी बढ़ रही है। मनरेगा वापसी की मांग को लेकर 8 जनवरी से शुरू हो रहे राज्यव्यापी आंदोलन में भी कांग्रेस RJD को छोड़कर सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। मतलब बिहार में गठबंधन टूट रहा है।

खास बात है कि दोनों पार्टियों की रिश्तों में कड़वाहट प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद दिख रही है।
क्या कांग्रेस बिहार में एकला चलो की राह पर है। RJD-कांग्रेस के अलग होने के पीछे प्रशांत किशोर हैं। कांग्रेस क्या नया समीकरण बना सकती है। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…।
4 पॉइंट में कांग्रेस नेता क्यों RJD से गठबंधन तोड़ना चाहते हैं…
1. बिहार कांग्रेस की राय- गठबंधन से कोई फायदा नहीं
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार को लेकर कांग्रेस लगातार रिव्यू मीटिंग कर रही है। इसमें प्रदेश स्तर के नेताओं ने ग्राउंड से फीडबैक लेकर बताया कि RJD के साथ गठबंधन से कोई फायदा नहीं है। दिल्ली में हुई कांग्रेस की रिव्यू मीटिंग में भी बिहार के नेताओं ने राहुल गांधी के सामने इस बात को दोहराया।

आंकड़ों भी बता रहे हैं कि कांग्रेस को RJD के साथ रहने से कोई फायदा नहीं हुआ है। इसे ऐसे समझिए…
4 विधानसभा चुनाव में से 3 चुनाव में कांग्रेस RJD के साथ गठबंधन में लड़ी है। इसमें से सिर्फ 1 विधानसभा चुनाव 2015 में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि, तब नीतीश कुमार की पार्टी JDU भी कांग्रेस के साथ लड़ी थी।
कांग्रेस 2010 विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ी थी, तब पार्टी को सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, तब भी वोट शेयर 8.4% था। 2025 में गठबंधन के साथ लड़ी तब पार्टी का वोट शेयर 8.9% रहा। मतलब सिर्फ 0.5% की बढ़ोत्तरी।
बीते 4 लोकसभा चुनाव में से 3 में कांग्रेस-RJD गठबंधन में चुनाव लड़े। इसमें कांग्रेस को खास सफलता नहीं मिली.



