Rajnandgaon: धर्मापुर में चल रहा था धर्मांतरण का ट्रेनिंग सेंटर, विदेशों से फंडिग, कई जिलें में फैला नेटवर्क…

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BY : PRANJAL YADAV

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राजनांदगांव जिले के एक छोटे से गांव धर्मापुर में हाल ही में सामने आया मामला अब पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. पुलिस जांच में पता चला है कि यहां से एक सुनियोजित और व्यापक धर्मांतरण नेटवर्क संचालित किया जा रहा था.

राजनांदगांव जिले के एक छोटे से गांव धर्मापुर में हाल ही में सामने आया मामला अब पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. पुलिस जांच में पता चला है कि यहां से एक सुनियोजित और व्यापक धर्मांतरण नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, जो सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों तक फैला हुआ था. जानकारी मिल रही है डेविड चाको का पासपोर्ट को पुलिस ने जप्त कर लिया है.

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धर्मापुर में चल रहा था धर्मांतरण का ट्रेनिंग सेंटर


यह नेटवर्क विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों – जैसे अनाथ बच्चों, विधवाओं, गरीबों और बेघर लोगों को निशाना बनाता था. इन लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें आश्रम में रखा जाता, मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता और धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन की ओर प्रेरित किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क में ट्रेनिंग, टारगेट निर्धारण और डिजिटल मॉनिटरिंग का पूरा सिस्टम मौजूद था, जिसमें विदेशी फंडिंग और उपकरणों का भी इस्तेमाल होने के संकेत मिले हैं। इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र बिंदु डेविड चाको था, जिसके घर में ही एक आश्रम और चर्च जैसी संरचना बनाई गई थी. यहां से पूरे छत्तीसगढ़ में गतिविधियों का नियंत्रण और समन्वय किया जाता था.

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क्या है पूरा मामला?


पुलिस ने 8 जनवरी 2026 को प्राप्त शिकायत के आधार पर कार्रवाई की, जिसमें नाबालिग बच्चों को रखने और अवैध गतिविधियों के आरोप शामिल थे. डेविड चाको को हिरासत में ले लिया गया है और उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है. गांव में छापेमारी के बाद भी कोई बड़ा तनाव या हड़कंप नहीं दिखा. स्थानीय लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं, कुछ खेतों में काम कर रहे हैं, तो कुछ चौराहे पर बैठकर बातें कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद गांव में चर्चा जरूर फैल गई है. कुछ ग्रामीणों का कहना है कि डेविड चाको के यहां रोजाना आने-जाने वाले लोग ज्यादातर रात के समय दिखते थे, और कई नाबालिग बच्चे उनके साथ रहते थे जो स्थानीय स्कूल में पढ़ाई करते थे.

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कई जिलें में फैला नेटवर्क


उनकी गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध लग रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह इतना बड़ा संगठित नेटवर्क है. पुलिस का दावा है कि जब्त दस्तावेजों, रजिस्टरों और डिजिटल साक्ष्यों से यह साफ हो रहा है कि नेटवर्क राज्य के कई हिस्सों में फैला हुआ है और इसमें और लोगों की संलिप्तता हो सकती है. जांच अब आगे बढ़ रही है, और पुलिस विभिन्न जिलों में छापेमारी और पूछताछ जारी रखे हुए है.
यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि समाज के कमजोर तबकों का शोषण कर धर्मांतरण जैसी गतिविधियां कैसे संचालित की जा रही हैं, और ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए कानून और जागरूकता दोनों की कितनी सख्त जरूरत है.


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