निगम की सीमाकर वसूली पर मचा घमासान : उद्योगों का शोषण बर्दाश्त नहीं – पांडे…

Share Now

भिलाईनगर, 18 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा जारी किए गए सीमाकर/निर्यात कर (टर्मिनल टैक्स) नोटिसों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद भी निगम द्वारा उद्योगों पर कर लगाना गंभीर विषय है और इससे प्रदेश की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुँच रहा है। श्री पाण्डेय ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं वित्तमंत्री ओपी चौधरी को प्रतिलिपि के माध्यम से इस विषय से अवगत कराया है।



श्री पाण्डेय के पत्र के अनुसार नगर निगम भिलाई ने अपने क्षेत्र में कार्यरत लगभग 50-60 लघु एवं मध्यम उद्योगों को नोटिस जारी कर भारी राशि की मांग की है। यह मांग वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक की अवधि के लिए की गई है। निगम ने इन नोटिसों में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 173 और मध्यप्रदेश नगर पालिका सीमा से निर्यातित वस्तुओं पर टर्मिनल टैक्स नियम 1996 (नियम 4 और 7) का हवाला दिया है।

श्री पाण्डेय ने पत्र में स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2017 से देशभर में जीएसटी लागू हो चुका है। संविधान के 101वें संशोधन अधिनियम, 2016 और अनुच्छेद 246 व 269 के अनुसार वस्तुओं के उत्पादन, विक्रय, आपूर्ति और परिवहन पर कराधिकार केवल केंद्र और राज्य सरकारों को है। ऐसे में नगर निगम द्वारा टर्मिनल टैक्स वसूली करना अब कानूनी रूप से अप्रभावी (inoperative) है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 265 का उल्लंघन है, क्योंकि कर केवल विधि द्वारा ही लगाया जा सकता है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि जीएसटी लागू होने के बाद नगर निकायों को क्षतिपूर्ति के रूप में जीएसटी का हिस्सा दिया जाता है। अनुच्छेद 243X के तहत नगर निकायों को वित्तीय अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।


पाण्डेय ने कहा कि सीमाकर से उद्योगों का उत्पीड़न हो रहा है, निवेश और रोजगार पर विपरीत असर पड़ रहा है तथा राज्य की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव से मांग की है कि निगम द्वारा जारी सभी नोटिसों की तत्काल जांच और विधिक समीक्षा कराई जाए। साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग से स्पष्ट शासनादेश जारी कर नगर निगमों को ऐसे कर लगाने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय तक निगम द्वारा वसूली पर रोक लगाई जाए और उद्योगों/फैक्ट्रियों पर दंडात्मक या सीलिंग जैसी कार्रवाई न की जाए।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *