नाबालिग से गवर्नमेंट रेस्ट हाउस, दफ्तर-होटल में गैंगरेप: दुर्ग में शरीर को नोंचा, दांतों से काटा; सांसद का PA, कारोबारी और सरकारी कर्मचारी आरोपी…..

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BY : Pranjal Yadav

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यह सिर्फ गैंगरेप की कहानी नहीं है… यह रोजी, डर और रसूख के गठजोड़ से रची गई ऐसी दरिंदगी है, जो 7 साल तक एक नाबालिग की सांसों पर पहरा बनकर बैठी रही। मां को नौकरी देने के बदले बेटी की इज्जत गिरवी रखी गई। सरकारी दफ्तर, रेस्ट हाउस, होटल और रसूखदारों के घर, हर जगह इंसानियत का कत्ल होता रहा, और खामोशी को वीडियो की धमकियों से जकड़ दिया गया।

शुरुआत मां को झाड़ू-पोछा की नौकरी देने के नाम पर हुई और अंत तक उसकी बेटी के देह को सौदे की तरह इस्तेमाल किया गया। हैवानियत की ये कहानी सुनकर रूह कांप जाएगी। नौकरी लगवाने के बाद लड़की से हर छुट्टियों के दिन दुष्कर्म, पीछा छोड़ने के नाम पर भी दुष्कर्म। हद तो तब हो गई जब शादी तुड़वाने लड़की के शरीर पर दांतों से काटने के निशान बना दिए गए।

यह कहानी दर्द की नहीं, उस क्रूर व्यवस्था की है, जिसमें एक लड़की को जीते-जी तोड़ दिया, लेकिन खामोशी के बाद जब उसने सच बोला, तो पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा हो गया।

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यह सिर्फ गैंगरेप की कहानी नहीं है… यह रोजी, डर और रसूख के गठजोड़ से रची गई ऐसी दरिंदगी है, जो 7 साल तक एक नाबालिग की सांसों पर पहरा बनकर बैठी रही। मां को नौकरी देने के बदले बेटी की इज्जत गिरवी रखी गई। सरकारी दफ्तर, रेस्ट हाउस, होटल और रसूखदारों के घर, हर जगह इंसानियत का कत्ल होता रहा, और खामोशी को वीडियो की धमकियों से जकड़ दिया गया।

शुरुआत मां को झाड़ू-पोछा की नौकरी देने के नाम पर हुई और अंत तक उसकी बेटी के देह को सौदे की तरह इस्तेमाल किया गया। हैवानियत की ये कहानी सुनकर रूह कांप जाएगी। नौकरी लगवाने के बाद लड़की से हर छुट्टियों के दिन दुष्कर्म, पीछा छोड़ने के नाम पर भी दुष्कर्म। हद तो तब हो गई जब शादी तुड़वाने लड़की के शरीर पर दांतों से काटने के निशान बना दिए गए।

यह कहानी दर्द की नहीं, उस क्रूर व्यवस्था की है, जिसमें एक लड़की को जीते-जी तोड़ दिया, लेकिन खामोशी के बाद जब उसने सच बोला, तो पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा हो गया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नाबालिग से 7 सालों तक गैंगरेप हुआ है। पीड़िता के आरोप के मुताबिक, आरोपियों में PWD विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी, कारोबारी, BJP सांसद का पूर्व पीए शामिल है। मामला महिला थाने में दर्ज हुआ है।

इस रिपोर्ट में पढ़िए रोजी के नाम पर रसूखदारों ने नाबालिग को कैसे अपने जाल में फंसाया और किस हद तक की दरिंदगी की गई। आखिरकार किस तरह पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और थाने तक पहुंची…

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मां काम पर जाती थी तो करते थे दुष्कर्म

साल 2018 से यह सिलसिला शुरू हुआ। जब 14 साल की नाबालिग अपनी मां के साथ अप्रैल 2018 में बिलासपुर से दुर्ग पहुंची। उसके किसी रिश्तेदार ने नौकरी के लिए गोविंद सिंह ठाकुर से मुलाकात करवाई थी। गोविंद सिंह पीडब्ल्यूडी विभाग में पदस्थ था।

आरोपी गोविंद ने दुर्ग के सिविल लाइन क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी के क्वार्टर में मां-बेटी को ठहरवाया और मां को झाड़ू-पोछा का काम दिलवा दिया। जब पीड़िता की मां काम पर जाती थी, तब वह अकेली रहती थी।

इसी दौरान अप्रैल 2018 के अंतिम सप्ताह में गोविंद ठाकुर और विभाग के ही एक कर्मचारी राजू कश्यप ने क्वार्टर में नाबालिग से बारी-बारी से दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद उसे धमकाया गया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे दुर्ग से भगा दिया जाएगा।

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लॉकडाउन के समय बिलासपुर लौट गई थी दोनों

साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान काम बंद होने पर मां-बेटी से क्वार्टर खाली करवा दिया गया। इसके करीब 6 महीने बाद वे दुर्ग लौटे और किसी अन्य क्षेत्र में रहने लगे। धीरे-धीरे इस सदमे से बाहर निकलने लगी थी और 2022-23 में नाबालिग ने पढ़ाई भी शुरू कर दी थी।

जुलाई 2023 में राजू कश्यप ने उसे फोन कर नौकरी का ऑफर दिया और पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस बुलाया। पीड़िता की रिपोर्ट के मुताबिक बीएन पांडेय, जो कि दुर्ग सांसद विजय बघेल के पूर्व पीए रहे हैं। उसने नौकरी दिलाने में मदद की।

पांडेय ने पीडबल्यूडी में फोन कर अफसरों को निर्देशित किया था। रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में हर जगह प्रभाव जमाया। नौकरी की वजह से पीड़िता दबाव में थी। अब आरोपी उससे वाट्सऐप पर न्यूड वीडियो मंगवाने लगे। स्टाफ ग्रुप में वीडियो वायरल करने की धमकी देते लगे। इस तरह से लड़की को लंबे समय तक डर में रखा।

इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर उसे बुलाकर कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस दौरान भी फोटो-वीडियो बनाए गए। हालांकि, दुर्ग सांसद विजय बघेल ने बीएन पांडेय के उनके PA होने से इंकार किया है। उन्होंने कहा है कि वह निज सहायक पद पर नहीं था। डिपार्टमेंटल अटैच में काम कर रहा था।

नौकरी लगने के बाद हर छुट्टी के दिन दुष्कर्म

पीडब्ल्यूडी में संविदा नौकरी लगवाने के बाद हर छुट्टियों के दिन नाबालिग को बुलाकर शोषण किया जाता रहा। इतना ही नहीं आरोपी व्हाट्सऐप कॉल के जरिए न्यूड फोटो और वीडियो की मांग करते थे। मना करने पर परिवार को बताने की धमकी देते थे।

इसके बाद 2024 में कारोबारी अनिल चौधरी के घर पर बुलाकर फिर से सामूहिक दुष्कर्म किया। अगस्त 2024 को उसे कवर्धा ले जाया गया और वहां रेस्ट हाउस में भी गैंगरेप हुआ और इसके बाद पाटन के रेस्ट हाउस में भी रेप किया गया।


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