महासमुंद जिले में धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर से हुई थी, लेकिन डेढ़ महीने के करीब समय बीतने के बाद भी अब तक महज 35 प्रतिशत धान की ही खरीदी हो पाई है। धान खरीदी की लिमिट कम होने और उठाव की रफ्तार बेहद धीमी रहने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

महासमुंद जिले में कुल 182 धान उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। जिले में पंजीकृत किसानों की संख्या 1 लाख 59 हजार 508 है, लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 48 हजार 164 किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। यानी बड़ी संख्या में किसान अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

जिला खाद्य अधिकारी का कहना है कि धान खरीदी की अवधि समाप्त होने में अभी 27 दिन शेष हैं और शेष दिनों में धान खरीदी का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, धान उपार्जन केंद्रों के प्रभारियों की चिंता इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। उनका कहना है कि खरीदी के लिए अब गिनती के दिन बचे हैं। मौजूदा लिमिट काफी कम है और धान का उठाव भी न के बराबर हो रहा है। ऐसी स्थिति में यदि लिमिट नहीं बढ़ाई गई और उठाव नियमित नहीं हुआ तो तय समय में खरीदी पूरी होना मुश्किल है।

बारोंडा बाजार, बम्हनी, बेलसोंढा, जोबा, अछोला और तुमगांव जैसे कई केंद्रों में अब तक सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत धान की ही खरीदी हो पाई है। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि वर्तमान लिमिट लगभग आधी है। शेष 27 दिनों में यदि लिमिट दुगुनी नहीं की गई तो सैकड़ों किसान धान बेचने से वंचित रह जाएंगे।

कुल मिलाकर, धान खरीदी की धीमी रफ्तार ने प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर साफ कर दिया है। अब देखना होगा कि शेष बचे दिनों में प्रशासन लिमिट बढ़ाकर और उठाव तेज कर किसानों की चिंता दूर कर पाता है या नहीं।

