प्रेम विवाह के खिलाफ गांव वाले, परिवार से बहिष्कार करने का निर्णय…..

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BY : Pranjal Yadav

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एमपी। रतलाम जिले के ग्राम पंचेवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. क्योंकि पंचेवा गांव ने प्रेम विवाह करने वालों और उनके परिवारों को सामाजिक सज़ा देने की खुली घोषणा की है.

जिसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. वीडियो में एक युवक यह ऐलान करते हुए साफ सुनाई देता है कि अब गांव में यदि कोई लड़का या लड़की लव मैरिज करता है तो उसे सामाजिक रूप से बेदखल कर दिया जाएगा. साथ ही युवक और युवती के परिवार वालों को भी बेदखल किया जाएगा.

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वीडियो में यह भी तय किया जाता है कि ऐसे परिवारों को गांव में दूध नहीं दिया जाएगा. किसी भी शुभ या धार्मिक आयोजन में शामिल नहीं किया जाएगा, गांव की बैठकों, चर्चाओं और सामूहिक फैसलों से बाहर रखा जाएगा. मजदूरी पर नहीं बुलाया जाएगा और गांव के लोग उनसे मिलना-जुलना तक बंद कर देंगे

. यह साफ तौर पर सामाजिक बहिष्कार के जरिए जीवन को असंभव बनाने की धमकी है. वीडियो का एक और गंभीर पहलू यह भी है कि जब यह घोषणा की जा रही थी, उस समय वहां कई अन्य युवक और ग्रामीण बैठे हुए थे. जो इस फैसले को मौन सहमति देते नजर आते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि यह किसी एक व्यक्ति की राय नहीं, बल्कि सामूहिक मानसिकता और भीड़ के फैसले का रूप ले चुका है. बड़ा सवाल यह है कि क्या गांव की ऐसी घोषणाएं संविधान से ऊपर जाकर लागू होंगी?

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है. अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता की गारंटी देता है और अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने व अपनी निजी पसंद के निर्णय लेने का अधिकार देता है. इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट बार-बार यह स्पष्ट कर चुका है कि दो वयस्कों को अपनी पसंद से विवाह करने का पूर्ण अधिकार है, चाहे वह विवाह समाज या परिवार की परंपराओं के खिलाफ ही क्यों न हो. इस वीडियो के वायरल होने के बाद जब गांव के लोगों से बात की गई तो उनका कहना था कि घर से भागकर प्रेम विवाह करने से गांव का माहौल खराब हो रहा है.

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इसी माहौल को देखते हुए कई लड़कियों के माता पिता ने अपनी लड़कियों का स्कूल कॉलेज जाना बंद करा दिया है. इसकी वजह से उनकी लड़कियों पर इन घटनाओ का कोई असर नहीं हो इसलिए उन्होंने ऐसा किया है. ग्रामीण कहते हैं कि वह प्रेम विवाह के विरोधी नहीं हैं लेकिन प्रेम विवाह में दोनों लड़की-लड़के के माता पिता की सहमति होना जरूरी होना चाहिए. लड़की घर से भागकर लड़के से शादी कर लेती है लेकिन वापस लौटती है तो वह अपने बयान में माता-पिता के खिलाफ ही बोलती है. इससे लड़की को जन्म देने वाले माता-पिता के दिल पर क्या गुजरती है? यह कोई नहीं समझ सकता.

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