दुर्ग में पति ने पत्नी को जिंदा जलायाः पहली पत्नी का पक्ष लेने पर होता था विवाद, 12 साल बाद आरोपी को उम्रकैद की सजा……

Share Now

By: Pranjal Yadav

Advertisement

दुर्ग में घरेलू विवाद के चलते पति ने अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया था। इस 12 साल पुराने मामले में अब सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, कोर्ट ने इसे ‘विरल से विरलतम’ अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड से इनकार कर दिया। यह घटना नेवई थाना क्षेत्र की है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 15 जनवरी 2012 की रात को हुई थी। नेवई के मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ घर पर थी। आरोपी घांसूराम अपनी पूर्व पत्नी सुमन का पक्ष लेता था। जिस कारण पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था।

घटना वाली रात करीब 9:30 बजे आरोपी घांसूराम शराब के नशे में घर पहुंचा। उसने पत्नी ममता से गाली-गलौज की और मारपीट करने लगा। जान से मारने की धमकी देते हुए उसने एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर उड़ेल दिया।

Advertisement

पत्नी ने आग लगाई, पति ने दोबारा तेल डाला

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गुस्से और भय की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बाद आरोपी ने जलती हुई पत्नी पर दोबारा मिट्टी का तेल डाल दिया, जिससे आग और भड़क उठी और ममता गंभीर रूप से झुलस गई। ममता की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

नेवई थाना को घटना की सूचना रात 9:40 बजे मिली। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ममता को गंभीर हालत में शासकीय अस्पताल, दुर्ग के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया।

अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डी. आर. मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। अपने बयान में ममता ने स्पष्ट रूप से बताया कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला था और आग लगने के बाद भी उस पर केरोसिन डालता रहा।

Advertisement



इलाज के दौरान मौत, हत्या में बदला मामला

पहले पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) में केस दर्ज किया। लेकिन 22 जनवरी 2012 को इलाज के दौरान ममता की मौत हो गई, जिसके बाद मामला धारा 302 (हत्या) में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जली साड़ी, जले कपड़े और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की।

12 साल तक फरार रहा आरोपी, 2024 में हुई गिरफ्तारी

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। वर्ष 2014 में कोर्ट ने उसे फरार घोषित कर स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद 17 नवंबर 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।

Advertisement



कोर्ट का फैसला- दोषी को उम्रकैद

सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने सभी साक्ष्य, गवाहों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि अपराध गंभीर है, लेकिन यह “विरल से विरलतम” श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास ₹1000 अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

Advertisement

Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *