BY : Pranjal Yadav

भिलाई नगर 09 फरवरी 2026:- भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि नगर पालिक निगम मिलाई की परियोजना शाखा में 12.66 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक कार्यों में संगठित भ्रष्टाचार का खुलासा जांच से बचने के लिए फाइने छुपाई जा रहीं. आयुक्त की भूमिका संदेह के घेरे में ।
नगर पालिका निगम भिलाई की परियोजना शाखा की कार्यर्शनी लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अब उपलब्ध तथ्यौः दस्तावेजों एवं शपश्च पनों के आधार पर यह स्पष्ट होता आ रहा है कि परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक का यों में करोड़ों रुपये का सुनियोजित भ्रष्टाचार किया गया है।
पिछले 23 महीनों की अवधि में परियोजना शाखा के माध्यम से लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपये के पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत एवं भुगतान किए गए, जिनमें भारी वित्तीय अनियमितताएं, नियमौ की खुली अवहेलना और भ्रष्ट आचरण सामने आए हैं।

सामान्य सभा में शपथ पत्र के साथ सीधा आरोप
भाजपा पार्षद श्री संतोष मौर्य द्वारा दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा में विधिवत शपथ पत्र प्रस्तुत कर परियोजना शाखा के कार्यों पर सीधा और स्पष्ट आरोप लगाया गया।
श्री मौर्य ने अपने शपथ पत्र में यह स्पष्ट कहा कि
परियोजना शाखा अंतर्गत कराए गए अधिकांश पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत प्राक्कलनों के अनुरूप नहीं हैं।
कायर्यों में गुणवत्ता, मात्रा, स्थल एवं भुगतान सभी स्तरों पर गंभीर अनियमितता की गई है।
इन कार्यों की जांच कलेक्टर महोदय की प्रत्यक्ष निगरानी में, नगर निगम से इतर अन्य विभार्गा के अधिकारियों की संयुक्त समिति से कराई जाए।
पार्षदी दाव पर लगाकर जांच की मांग भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि

हो।
सामान्य सभा में सफाई कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच समिति का गठन किया गया था।
समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद लगभगाएक वर्ष बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। यह सब दर्शाता है कि नगर निगम प्रशासन में पारदर्शिता समाप्त हो चुकी है।
परियोजना शाखा का दुरुपयोग
परियोजना शाखा का गठन बड़े और विशेष योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु किया गया था, किंतु 1 जनवरी 2022 से आज तक परियोजना शाखा द्वारा कोई भी बड़ी जनहितकारी योजना धरातल पर नहीं उतारी गई। उद्यान, वाहन, निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं, जबकि इनके लिए निगम में अलग-अलग विभाग पहले से मौजूद हैं।
*50,000 से लेकर ₹5 करोड़ तक की निविदाएं परियोजना शाखा से जारी की जा रही है।
पसंदीदा इंजीनियरों की नियुक्ति कर, पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा शर्तें बनाई जा रही हैं।
पिछले दो वर्षों में न तो आम जनता को कोई लाभ मिला,न ही भाजपा पार्षदों के वार्डों में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य हुआ। यदि किसी को लाभ हुआ है, तो वह ठेकेदार अधिकारी गठजोड़ है।
भाजपा पार्षदों की स्पष्ट मांग
भाजपा पार्षद संतोष मौर्य सहित सभी भाजपा पार्षदों की मांग है कि-
परियोजना शाखा अंतर्गत सभी 33 कार्यों की कलेक्टर की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
छुपाई गई सभी फाइलों को तत्काल सार्वजनिक किया जाए।
दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
यदि शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा पार्षद आंदोलन, न्यायालय एवं अन्य संवैधानिक विकल्प अपनाने को विवश होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
