BY : VIKAS SINHA (RAIPUR)

बस्तर 25 दिसंबर 2025:- छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में 6 नक्सलियों को मार गिराया है। इनमें 1 करोड़ से ज्यादा का इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) गणेश उईके भी शामिल है। दो महिला नक्सली भी मारी गई हैं।

ओडिशा में सुरक्षा बलों ने माओवादी विरोध अभियान के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण परिचालन सफलता हासिल की है। कंधमाल एवं गंजाम जिलों के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में संयुक्त अभियान के दौरान एक वरिष्ठ माओवादी नेता को निष्क्रिय किया गया।

वर्ष 1988 से दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय गणेश उइके माओवादी संगठन का एक वरिष्ठ एक सक्रिय कैडर था। उसने जगदलपुर में सिटी ऑर्गनाइज़र (1988–1998), वेस्ट बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव (1998–2006) तथा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य (2006 के पश्चात) के रूप में कार्य किया।
⚫ गणेश उइके एक कट्टर माओवादी कैडर था, जिसके विरुद्ध छत्तीसगढ़ के सुकमा एवं बीजापुर जिलों में कुल 16 आपराधिक प्रकरण दर्ज थे। उसके आपराधिक antecedents से संबंधित विस्तृत विवरण संकलित किया जा रहा है।
⚫ गणेश उइके कई गंभीर अपराधों में संलिप्त था, जिनमें वर्ष 2014 में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र अंतर्गत तहकवाड़ा में पुलिस दल पर किया गया सशस्त्र हमला प्रमुख है, जिसमें 15 पुलिस जवान शहीद हुए। उसके आपराधिक कृत्यों में नागरिक हत्याएँ, हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, पुलिस बलों पर सशस्त्र हमले तथा हथियारों एवं विस्फोटकों का अवैध उपयोग एवं कब्जा शामिल है।
⚫ शेष तीन मारे गए माओवादी कैडरों की पहचान ओडिशा पुलिस द्वारा की जा रही है।

⚫ पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, श्री सुन्दरराज पैट्लिंगम ने बताया कि गणेश उइके की निष्क्रियता ओडिशा में माओवादी नेतृत्व संरचना, विशेषकर ओडिशा स्टेट कमेटी के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने आगे कहा कि इससे ओडिशा एवं आस-पास के क्षेत्रों में माओवादियों की कमान, नियंत्रण एवं समन्वय क्षमता गंभीर रूप से कमजोर होगी। आज की यह परिचालन सफलता सुरक्षा बलों की खुफिया-आधारित एवं समन्वित कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाती है तथा वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के प्रति सरकार की सतत प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करती है।

⚫ पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शेष बचे माओवादी कैडरों के पास हिंसा का मार्ग छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा में लौटने के अतिरिक्त कोई व्यवहारिक विकल्प नहीं बचा है, जिससे वे शांतिपूर्ण एवं सार्थक जीवन व्यतीत कर सकें।