BY : PRANJAL YADAV

रायपुर। राजधानी रायपुर के मेटल पार्क रावाभांटा क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने अपने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के कौशल का उपयोग करते हुए ट्रांसपोर्ट व्यवसायी से करोड़ों की संपत्ति अपने नाम करवा ली। मामला काफी समय से चल रहा था, जिसमें महिला ने व्यवसायी को दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर डराने और लाखों का मकान अपने नाम करवा लेने की कहानी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, महिला लगभग 10 वर्षों तक मजदूरी करती रही और उस दौरान ट्रांसपोर्ट व्यवसायी के संपर्क में आई। महिला ने व्यवसायी के साथ सात वर्षों तक संबंध बनाए रखे, इसी दौरान उसने व्यवसायी को ब्लैकमेल करना शुरू किया। महिला ने व्यवसायी से मकान बनवाया, लेकिन रजिस्ट्री में अपना नाम जोड़कर यह सुनिश्चित किया कि संपत्ति आधिकारिक रूप से भी उसके पास दर्ज हो जाए।
जब व्यवसायी को इस बारे में जानकारी हुई और उसने विरोध जताया, तब महिला ने व्यवसायी को धमकाया कि वह उसे दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर जेल भेज देगी। डर के मारे व्यवसायी ने हक–त्याग विलेख के माध्यम से मकान की रजिस्ट्री महिला के नाम कर दी। विलेख में व्यवसायी ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में महिला द्वारा उसकी शिकायत या किसी अतिरिक्त धन की मांग की गई तो विलेख शून्य माना जाएगा। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक, इन सात वर्षों के दौरान महिला ने व्यवसायी से लाखों रुपए के गहनों की खरीदी करवाई, जिससे उसके पास बड़ी मात्रा में आभूषण इकट्ठा हो गए। महिला का यह चालाक तरीका इसे हनी ट्रैप का मामला बनाता है।

महिला के राष्ट्रीय राजनीतिक दल से जुड़ाव के कारण कॉलोनी के लोग इस संबंध में सार्वजनिक रूप से शिकायत करने में हिचक रहे हैं। स्थानीय लोगों और पड़ोसियों का कहना है कि महिला के प्रभाव और राजनीतिक कनेक्शन के चलते कोई भी उसे चुनौती नहीं दे पा रहा। इस वजह से मामला लंबे समय तक दबा रहा और व्यवसायी ने कानूनी कार्रवाई भी करने में विलंब किया। हनीट्रैप और ब्लैकमेल के इस प्रकार के मामले कानूनी रूप से जटिल होते हैं, क्योंकि इसमें साक्ष्य जुटाना और प्रमाणित करना कठिन होता है। ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ने हक–त्याग विलेख के माध्यम से अपने अधिकारों की सुरक्षा की कोशिश की, लेकिन महिला ने चालाकी से संपत्ति अपने नाम कर ली।
वर्तमान में प्रशासन के संज्ञान का इंतजार है कि कब यह मामला उजागर होकर ब्लैकमेलिंग और हनी ट्रैप के आरोपों की जांच की जाएगी। स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर दबाव है कि इस प्रकार की संपत्ति हड़पने की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सूत्रों के अनुसार, महिला का गुरुर चरम पर है और उसने यह मान लिया है कि उसके राजनीतिक और सामाजिक कनेक्शन के चलते वह सुरक्षित है। वहीं, व्यवसायी का कहना है कि उसने किसी भी तरह की शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं कराई, जिससे महिला और अधिक निडर हो गई।


विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं स्थानीय स्तर पर सामाजिक और कानूनी संरचना पर भी प्रश्न उठाती हैं। अगर प्रशासन समय पर कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे मामले अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं और संपत्ति हड़पने जैसे कृत्य बढ़ सकते हैं। अभी देखना यह है कि कब प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा, कानूनी जांच शुरू करेगा और महिला को ब्लैकमेलिंग व हनी ट्रैप जैसे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराएगा। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत संपत्ति और विश्वास का दुरुपयोग कैसे किसी के जीवन और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में समय पर शिकायत और कानूनी कार्रवाई अत्यंत जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोका जा सके।
