
बेमेतरा जिले के बिरनपुर हिंसा कांड में रहीम और उनके बेटे ईदुल मोहम्मद की हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए 17 हिंदू युवकों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।
करीब 3 साल चली सुनवाई के बाद बरी हुए आरोपियों ने सरकार से मुआवजे के रूप में सरकारी नौकरी की मांग कर दी। उनका कहना है कि तीन साल तक हत्या जैसे गंभीर अपराध का मुकदमा झेलने, जेल जाने और सामाजिक बदनामी उठाने के कारण उनका भविष्य प्रभावित हुआ है।

इसलिए उन्हें मुआवजे के तौर पर सरकारी नौकरी दी जाए, उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दीक्षित की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कुल 52 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया और आरोपियों के खिलाफ ऐसे पुख्ता साक्ष्य सामने नहीं आए जिनके आधार पर दोष सिद्ध किया जा सके।

