भारत में “राइट टू डाई विद डिग्निटी” यानी सम्मान के साथ मृत्यु के अधिकार से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला… आज एक दुखद अंत तक पहुंच गया।

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हरीश राणा…

वो नाम जिसने देश में पैसिव यूथेनेशिया को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ी…

आज उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली।

करीब 13 साल से वो कोमा जैसी हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।

🎙️ बैकग्राउंड:

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें “पैसिव यूथेनेशिया” की अनुमति दी थी…

यानि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की इजाजत।

यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं…

बल्कि पूरे देश में “सम्मान के साथ मृत्यु” के अधिकार पर एक ऐतिहासिक पहल माना गया।


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