छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी (IED) ब्लास्ट की घटना पर प्रदेश की सियासत गरमा गई 

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रायपुर 3 मई 2026। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी (IED) ब्लास्ट की घटना पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है।


शहीदों को नमन और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना

भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए कांकेर की घटना को ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया। उन्होंने लिखा:

“बस्तर के कांकेर में माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में शहीद होने वाले इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबलों को हम सब भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।”

उन्होंने विस्फोट में घायल हुए कांस्टेबल के बेहतर इलाज की मांग करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना भी की है।


सरकार पर साधा निशाना: “नारों से नहीं होगा समाधान”

पूर्व मुख्यमंत्री ने नक्सल मोर्चे पर वर्तमान सरकार की रणनीति को सवालों के घेरे में खड़ा किया। बघेल ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विष्णुदेव साय सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि नक्सलवाद का खात्मा केवल राजनीतिक नारेबाजी से संभव नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल “नक्सलवाद खत्म हो गया” का दावा करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। बघेल के अनुसार, नक्सली अपने पीछे आतंक के जो ‘अवशेष’ (IED और गुप्त जाल) छोड़ गए हैं, उन्हें साफ करने के लिए एक विशेष और व्यापक अभियान छेड़ने की तत्काल आवश्यकता है।


“यह साझी लड़ाई है”

लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान करते हुए भूपेश बघेल ने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह जंग किसी एक दल की नहीं, बल्कि साझी लड़ाई है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि लोकतंत्र विरोधी ताकतों का ‘समूल नाश’ ही एकमात्र विकल्प है और इसके लिए सरकार को गंभीर इच्छाशक्ति दिखानी होगी।


प्रमुख बिंदु:

  • घटना: कांकेर में नक्सलियों द्वारा आईईडी ब्लास्ट।
  • नुकसान: एक इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल शहीद, एक जवान घायल।
  • बघेल की मांग: नक्सली अवशेषों (आतंकी जाल) की मुक्ति के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
  • राजनीतिक संदेश: खोखले नारों के बजाय धरातल पर काम करने की नसीहत।

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