
दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भाजपा नेता विजय बघेल ने भूपेश बघेल के चुनाव को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। इस याचिका में चुनाव के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

याचिका में आरोप है कि वोटिंग से 48 घंटे पहले लागू होने वाले साइलेंस पीरियड के दौरान भूपेश बघेल ने रोड शो किया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
इसी चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने के लिए भूपेश बघेल की ओर से कानूनी चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों और तथ्यों की जांच ट्रायल के दौरान की जा सकती है।

यानी कोर्ट ने फिलहाल यह नहीं कहा है कि भूपेश बघेल ने चुनाव नियमों का उल्लंघन किया है। बल्कि अदालत का फैसला इस बात को लेकर है कि लगाए गए आरोप ऐसे हैं, जिन पर आगे सुनवाई और सबूतों के आधार पर फैसला किया जा सकता है।
अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे और सबूत रखने का मौका मिलेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और उनका चुनाव परिणाम पर क्या कानूनी असर पड़ता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई और ट्रायल के दौरान सामने आने वाले सबूतों पर सभी की नजर रहेगी।