जनप्रतिनिधियों की ” चुप्पी” दम तोड़ देगी भिलाई को बचाने की लड़ाई …सेल प्रबंधन पर सांसद और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के अल्टीमेटम का असर नहीं : भिलाइयंस के लिये विधायक के पास नहीं है टाइम …

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BY : Pranjal Yadav

भिलाई नगर। सेल-बीएसपी प्रबंधन की निजीकरण की नीति के खिलाफ भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव की पदयात्रा स्थगित कर दी गई है। वजह ये है कि विधायक देवेंद्र यादव 15 दिनों में भी पदयात्रा की तैयारी नहीं कर पाए। 9 जनवरी को विधायक देवेंद्र यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में पदयात्रा का  ऐलान किया था। देवेंद्र ने सभी वार्डों का दौरा कर जनसमर्थन जुटाने और आम जनता से रायशुमारी के बाद पदयात्रा निकालने की जानकारी दी। आज 24 जनवरी को प्रेस बयान जारी कर पदयात्रा स्थगित करने की जानकारी दी गई है।

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विधायक देवेन्द्र ने भिलाई को बिकने नहीं देंगे जन-जागरण अभियान के तहत सिविक सेंटर भिलाई में 5 दिनों का उपवास रखा था। इसके बाद बीएसपी प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन की मौजूदगी में त्रिपक्षीय चर्चा हुई। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय सेक्टर.-9 को लीज पर न देने, अस्पताल में कार्य करने वाले कर्मचारी और पूर्व कर्मचारियों की सुविधाएं यथावत रखने और मैत्री बाग को किसी भी संस्थान को लीज पर न देने की सहमति बनी थी।

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रिटेंशन स्कीम को लेकर प्रबंधन की ओर से संतोषप्रद जवाब न मिलने पर विधायक यादव ने 15 दिन का समय दिया था। प्रबंधन की ओर से जवाब न मिलने पर 14 जनवरी को जन-जागरण अभियान के तहत वार्ड दौरा शुरू किया गया। अब तक टाउनशिप के सेक्टर-2, सेक्टर-3, 4, सेक्टर-6, सेक्टर-7, हुडको, जोन-2 केएलसी खुर्सीपार के रिटेंशन स्कीम और लायसेंस के तहत आवंटित आवासधारियों से भेंट-मुलाकात की गई है। आंदोलन को क्रमबद्ध जारी रखने के लिए कई सुझाव देवेंद्र को दिये गए हैं।

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वार्ड दौरे में कर्मियों ने देवेंद्र को दी राय

वार्ड दौरे के दौरान आवासधारी कर्मियों ने बताया कि वर्ष 1995 से 2000 के समयकाल के अलावा भिलाई इस्पात संयंत्र कभी भी घाटे में नहीं रहा। इस यूनिट ने सेल को हमेशा प्राफिट दिया है। इसके बावजूद प्रबंधन ने अपने कर्मियों को इस प्राफिट का श्रेय या लाभांश नहीं दिया। हमेशा प्राफिट में रहने के बावजूद 39 माह के एरियर्स का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। हाउस रेंट अलाउंस 2014 के बाद रिवाइज ही नहीं किया गया है। आवासों का मेंटनेंस नहीं किया जा रहा है। बैकलेन की सफाई के आवेदनों पर सुनवाई नहीं हो रही है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई गई है। कार्मिकों को दोहरे आवास के नाम पर विजिलेंस जांच की धमकी देकर अनुशासनात्क कार्रवाई, रिटेंशन की वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी जैसे कई विषयों पर भी अपनी राय दी है।

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सांसद बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के साथ बीएसपी प्रबंधन की चर्चा भी बेअसर 

भिलाई टाउनशिप में बीएसपी के आवासों को लेकर लागू की गई नई गाइडलाइन, रिटेंशन स्कीम, मैत्रीबाग, स्कूलों के निजीकरण, बीएसपी कर्मचारियों के अन्य मुद्दों को लेकर लाइसेंसी और थर्ड पार्टी अलॉटी, दुकानों के लीज नवीनीकरण जैसे मुद्दों को लेकर भिलाइयंस काफी परेशान हैं। भाजपा सांसद विजय बघेल और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने इस मुद्दे पर 13 दिसंंबर को बीएसपी प्रबंधन से चर्चा कर 10 दिन का अल्टीमेटम दिया। नेता द्वय ने डीआईसी महापात्रा से मुलाकात के दौरान रिटेंशन, व्यापारियों के लीज रिन्यूअल, निजीकरण, कर्मचारियों की सुरक्षा, 20 प्रतिशत श्रमिकों की छंटनी, विद्युत विभाग को राज्य सरकार को सौंपने, लीज धारकों के जर्जर आवासों की मरम्मत जैसे बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। सख्त लहजे में 10 दिनों के भीतर सार्थक निर्णय लेने कहा।

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सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने चेतावनी भी दी। साफ कहा कि प्रबंधन ने सही निर्णय नहीं लिया तो जन आक्रोश बढ़ सकता है। सांसद और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के 10 दिनों के अल्टीमेटम का  असर कितना हुआ, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि 40 दिन बीतने के बाद भी सेल प्रबंधन ने इन मुद्दोंं पर कोई जवाब तक नहीं दिया है। किसी भी मुद्दे पर कोई फैसला भी नहीं किया गया है। खास बात ये है कि सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय ने 10 दिनों का अल्टीमेटम देने के बाद 40 दिन बीतने पर भी मौन साध रखा है। प्रबंधन केे रवैये पर आश्चर्यजनक ढंग से चुप्पी साध ली है।

तो बड़ा सवाल ये है कि जब विधायक देवेंद्र यादव को 15 दिन में भी पदयात्रा की तैयारी करने का समय नहीं मिल पाया हो … और सांसद विजय बघेल व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय जैसे कद्दावर नेताओं को बीएसपी प्रबंधन तवज्जो ही न दे … तो फिर भिलाई को बचाने की जंग आखिर कौन लड़ेगा।

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