दूषित पानी से 29वीं मौत.. हाईकोर्ट ने बनाया स्वतंत्र जांच आयोग : 23मौतों की रिपोर्ट पेश, 16 गंदे पानी से मानी; कोर्ट ने कहा- रिपोर्ट सिर्फ आई वॉश

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BY : Pranjal Yadav

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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया है। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है और स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है।

एक और मौत, आंकड़ा 29 पहुंचा

मंगलवार को भागीरथपुरा में एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जिससे अब तक मौतों की संख्या 29 पहुंच गई है। मृतक खूबचंद (63) पिछले 15 दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित थे। परिजनों के मुताबिक, वे पहले स्वस्थ थे और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।दैनिक जांच और स्वास्थ्य शिविर जारी रहेंगे

कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि भागीरथपुरा में दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर लगातार जारी रखे जाएं। जांच आयोग को चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट सौंपनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को तय की गई है।

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कोर्ट ने कहा- पेश की गई रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने रिपोर्ट में प्रयुक्त ‘वर्बल ऑटॉप्सी’ शब्द पर भी आपत्ति जताई और पूछा कि यह कोई मान्य मेडिकल शब्द है या अधिकारियों द्वारा गढ़ा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पेश की गई रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है और इसे केवल ‘आई-वॉश’ माना जा सकता है।

स्वतंत्र जांच आयोग का गठन

हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग इन बिंदुओं पर जांच करेगा –

जल प्रदूषण के वास्तविक कारण

मौतों की सही संख्या

फैली बीमारियों की प्रकृति

चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता. 

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका

पीड़ित परिवारों को मुआवजा

आयोग को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार

जांच आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह-

अधिकारियों व गवाहों को तलब कर सकेगा

दस्तावेज मंगा सकेगा

जल गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करा सकेगा

स्थल निरीक्षण कर सकेगा

राज्य सरकार को आयोग के लिए आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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हाईकोर्ट में ढाई घंटे सुनवाई

भागीरथपुरा मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में ढाई घंटे से अधिक समय तक सुनवाई चली। शासन की ओर से कोर्ट में 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी से होनी बताई गई। वहीं 4 मौतों को लेकर असमंजस और 3 मौतें दूषित पानी से नहीं होना बताई गईं।

मौतों के आंकड़ों पर भारी विरोधाभास

हाईकोर्ट ने मौतों के आंकड़ों को लेकर गंभीर असहमति दर्ज की। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतें जलजनित बीमारी से मानी गईं, वहीं याचिकाकर्ताओं ने करीब 30 मौतों का दावा किया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में मौतों के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हैं और पर्याप्त वैज्ञानिक व दस्तावेजी आधार का अभाव है।

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सिर्फ 8 पैरामीटर्स पर पानी की कैसी टेस्टिंग

हाईकोर्ट में निगम की ओर से तर्क दिया कि पानी की टेस्टिंग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 8 मानकों पर पानी की टेस्टिंग की गई जबकि 2018 में मप्र प्रदूषण मंडल ने भागीरथपुरा समेत इंदौर के पानी की 34 मानकों पर टेस्टिंग की थी। इस पानी को फिकल कंटामिनेटेड पाया था। ऐसे में जब भागीरथपुरा में 28 मौतें हो चुकी हैं तो निगम सिर्फ 8 मानकों पर टेस्टिंग कैसे कर रही है। निगम ने यह भी नहीं बताया कि टेस्टिंग का तरीका क्या था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से विश्वस्तरीय तीन पैरामीटर्स पर पानी की टेस्टिंग के तीन तरीके बताए गए।

मदद रेडक्रॉस सोसायटी से, शासन की ओर से कुछ भी नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मुआवजे को लेकर भी झूठी जानकारी दी जा रही है। अभी मृतकों को जो 2-2 लाख रुपए की राशि दी गई है वह रेड क्रॉस सोसायटी की ओर से दी जा रही है। शासन की ओर से तो कोई मुआवजा नहीं मिला। शासन अन्य हादसों में मृत व्यक्ति के परिजन को 4-4 लाख रुपए देती है लेकिन जिनकी दूषित पानी से मौत हुई हैं उनकी जिंदगी की कीमत नहीं लगाई। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है।

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