
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में Vedanta Limited के पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर एक भीषण बॉयलर ब्लास्ट हुआ… इस हादसे में 16 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं… कई अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।दोपहर करीब 2 बजे अचानक हुए इस धमाके ने पूरे प्लांट को हिला कर रख दिया… चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।लेकिन सवाल ये है— क्या ये पहली बार हुआ है? नहीं।साल 2009…कोरबा में Bharat Aluminium Company Limited के प्लांट में चिमनी गिरने से 40 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी…उस वक्त भी सुरक्षा में लापरवाही के आरोप लगे… मामले दर्ज हुए…


लेकिन 15 साल बाद भी… न किसी को सजा मिली… न ही इंसाफ।आज फिर वही सवाल खड़ा है— क्या मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं? क्या हर हादसा सिर्फ खबर बनकर रह जाएगा? विशेषज्ञ कहते हैं—सुरक्षा नियमों की अनदेखी और जवाबदेही की कमी ही ऐसी घटनाओं की असली वजह है। जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी… तब तक मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ कागजों में ही रहेगी। अब देखना ये है— क्या इस बार 16 मजदूरों को न्याय मिलेगा… या फिर ये मामला भी सालों तक फाइलों में दबा रहेगा?