

दुर्ग जिले में रिसाली और भिलाई नगर निगम के प्रस्तावित उपचुनाव को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दुर्ग कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी ने संशोधित आदेश जारी करते हुए उपचुनाव प्रक्रिया को प्रभाव शून्य घोषित कर दिया है। साथ ही इन वार्डों में लागू आदर्श आचार संहिता भी खत्म कर दी गई है।


दरअसल, रिसाली नगर निगम के वार्ड नंबर 2 और 39, जबकि भिलाई नगर निगम के वार्ड नंबर 1 में उपचुनाव प्रस्तावित था। लेकिन जिला न्यायालय दुर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ चौबे ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग को आवेदन सौंपा था।
आवेदन में कहा गया कि इन वार्डों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में ही समाप्त होने वाला है। यानी केवल 4 से 5 महीने के लिए चुनाव कराने में करोड़ों रुपये का खर्च होता… जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की ड्यूटी, मतदान सामग्री और ट्रेनिंग जैसे खर्च शामिल हैं।
अब आयोग के फैसले को उसी आपत्ति की बड़ी प्रशासनिक स्वीकार्यता माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले की चर्चा तेज है… क्योंकि माना जा रहा है कि आने वाले समय में अल्प कार्यकाल वाले निकायों में आयोग व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं को प्राथमिकता दे सकता है।
“फिलहाल सवाल यही…
क्या 4 महीने के लिए चुनाव कराना सच में जरूरी था… या फिर ये फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था?”