
डॉ. तीजन बाई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में चल रहा था। शनिवार देर रात करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला जगत, राजनीतिक हस्तियों और उनके चाहने वालों ने गहरा शोक व्यक्त किया।


महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज़, अद्भुत अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से जीवंत करने वाली तीजन बाई ने पंडवानी गायन को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक नई पहचान दिलाई। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।
भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके दशकों लंबे सांस्कृतिक योगदान की पहचान है।

जब उनकी तबीयत बिगड़ी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं फोन कर उनका हालचाल जाना था। उन्होंने परिवार से बातचीत कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया और कहा था कि तीजन बाई देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं।
13 वर्ष की छोटी उम्र से मंच पर अपनी कला का सफर शुरू करने वाली डॉ. तीजन बाई ने अपने जीवन का हर पल लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। आज उनके जाने से भारतीय लोक कला ने अपनी सबसे बुलंद आवाज़ों में से एक को खो दिया है।